[00:00] एक जमे था जब इंडिया में एलेक्ट्रोनिक, मतलब सिर्फ कुछ बड़े ब्रांड्स का काम माना जाता था लेकिन एक इंडियन कमपनी ने क्वाइटली ऐसा बिजनिस बनाया जहां ब्रांड उसका नहीं है लेकिन प्रोड़ड़ उसके फैक्टरी से निकलता है 1993 में सुनिल वचानी ने डिक्सन की शुरुवात की [00:14] 1994 में कमपणी ने कलर टेलेविजिन मैन्यूफाक्चर करना शुरू किया फिर धीरे धीरे डिक्सन ने लाइटिंग, वाशिंग मशीन, मोबाइल फोन, CCTV और दूसरे एलेक्ट्रोनिक सेगमेंट में एंट्री की [00:26] लेकिन असली गेम तब बदला जब डिक्सन ने समझा कि उसे खुद कोई कंजूमर ब्रांड बनाने की जरूरत नहीं है उसे ब्रांड के पीछे खड़े होकर मैन्यूफाक्चरिंग पार्टनर बनना है यानि Samsung, Xiaomi जैसे brands product बेचेंगे और Dixon उसे manufacture करने में मदद करेगा [00:40] इसी strategy ने Dixon को बना दिया Brand behind the brands 2017 में company stock market पर list हुई और इसके बाद India में electronics manufacturing smartphone assembly और government की PLI push ने [00:52] Dixon के growth story को और accelerate किया आज company mobile phone से लेकर consumer electronics telecom और कई emerging electronics categories तक expand कर चुकी है और FY26 में Dixon का revenue करीब 48,900 क्रोर रुपीस के आसपास पहुँच चुका है [01:07] लेकिन सबसे interesting बात Dixon की कहानी सिर्फ एक electronics company की कहानी नहीं है ये कहानी है कि India कैसे made in India से manufactured for the world की तरफ बढ़ रहा है