[00:00] एक मारवाडी ही होता है जो कि दस रुपए कमाएगा तो बारा रुपए बचा लेगा आप कहोगे दस रुपए कमा के बारा कैसे बचा लेगा समझाता हूँ देखो मिडिट क्लास जो होते हैं ना [00:13] हम अगर दस कमाते हैं तो पंधरा बताते हैं समाज़ में क्योंकि हमें लगता है जादा बताएंगे तो जादा इज़ात मिलेगी जादा वैल्यू मिलेगी लेकिन जादा इज़ात और जादा वैल्यू तो नहीं मिलती लेकिन जादा दुश्मन जरूर खड़े हो जाते हैं [00:29] जादा उधार मांगने वाले जरूर ख़ड़े हो जाते हैं ऐसे लोग जरूर ख़ड़े हो जाते हैं वो ये मांग मानते हैं को उनकी जरूरत पूरी करना आपकी जिम्मेदारी है अगर आप नहीं करोगे तो आप ठीक नहीं हो [00:42] और अगर आप उनकी जरूरत पूरी नहीं करते तो आपके दुश्मन बढ़ते हैं आपकी जीत को लोग अपनी हार समझने वाले बढ़ जाते हैं अब बात करते हैं मारवाडी पे [00:55] मारवाडी दस रुपए कमा के बारत कैसे बचा लेता है दर असल मारवाडी जब कमाता भीस है न [01:15] कभी वो अपनी कमाई का धिन्डोरा नहीं पीटते कभी अपनी कामयाबी का धिन्डोरा नहीं पीटते और याद रखे जब आप काम्याब हो रहे होते हो [01:27] तो कईों के पेट में दर्द हो रहा होता है कई लोग आपकी काम्याबी को उपनी हार मान रहे होते हैं आपकी काम्याबी लोगों के नीन धोडा रही होती है तो आपकी काम्याबी [01:40] लोगों के लिए दैषद रहे होता है इसलिए ली मारवाड़ी कभी भी अ्पनी कामिभी पैसा [01:54] घृत काई को दुनिया को बताना हो, नहीं चाहिए जूती इजजत दुनिया से, मारवाडियों से कोई उधार भी नहीं मांगता वैया, [02:09] तो मारवाडियों जैसे जिन्दगी जीओ वैया, पैसा भरपूर कमाओ, बताओ किसी को मत, कामयाब खूब हो, दिखाओ कि सीखों मात