[0:00] देखिए जी वीडियोस में तो मेरा काफी [0:02] इंटरेस्ट है। वीडियोस मैं बहुत सारे बनाता [0:04] भी हूं। मुझे बहुत अच्छा लगता है वीडियोस [0:06] बनाना। प्रोसेस भी करते हैं, स्टोर भी [0:08] करते हैं। उनको एचएलएस फ्रेंडली भी बनाते [0:11] हैं। स्ट्रीमिंग फ्रेंडली जिसको बोलते हैं [0:13] और वीडियोस में मेरा पर्सनली बहुत [0:15] इंटरेस्ट है। तो जैसे ही मैंने Facebook [0:16] का एक इंजीनियरिंग ब्लॉग का आर्टिकल देखा [0:19] जिसमें इन्होंने एफएफएम पे के नए [0:21] इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में बात करी है [0:23] कि ये लोग अ बिलियंस ऑफ वीडियोस हैंडल कर [0:26] रहे हैं न्यू इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ में। [0:28] और इस न्यू इंफ्रास्ट्रक्चर ने ही एफएफएमक [0:30] के लास्ट दो वर्जनंस को इंस्पायर किया है। [0:32] होपफुली। तो मुझे लगा कि यार इस पे तो बात [0:35] होनी चाहिए। यह तो बड़ा इंटरेस्टिंग और [0:36] मेरा वन ऑफ द फेवरेट सब्जेक्ट है। तो हां [0:39] जी। Facebook तकरीबन 1 बिलियन वीडियोस को [0:41] प्रोसेस कर रहा है। काफी मैंने नोट्स [0:44] वगैरह भी बना रखे हैं इस पे। तो साथ में [0:45] मैं आपको पहले नोट्स समझाऊंगा क्योंकि इन [0:47] आर्टिकल्स को समझना कई बार आसान नहीं [0:49] होता। बट क्या करें? कभी ना कभी तो [0:51] स्टैंडर्ड रेज करना ही है। तो आइए साथ में [0:53] हम इसको पढ़ेंगे। मैंने पर प्री प्रिपेयर [0:56] नोट्स हैं ताकि मैं आपको एक उस लेवल पर ले [0:57] जा सकूं जिससे आप समझ पाएं कि अच्छा ये सब [0:59] होता क्या है? क्या कहानियां होती है। बाय [1:01] द वे अगर चैनल पे नए हैं तो सब्सक्राइब कर [1:03] दीजिएगा। यहां पे हम बहुत सारे [1:04] ट्यूटोरियल्स भी लाते हैं, सिस्टम डिजाइन [1:06] की भी बात करते हैं। ऐसे आर्टिकल्स भी [1:08] पढ़ते हैं और लेटेस्ट टेक न्यूज़ वगैरह यह [1:10] सब तो खैर चलता ही रहता है। इसमें तो मजा [1:12] आता ही है। और अगर पुराने हो चैनल पे तो [1:15] प्लीज कमेंट जरूर करके जाइएगा एक कि आपको [1:17] और सिस्टम डिजाइन के वीडियो ज्यादा [1:19] प्रेफर्ड है या ट्यूटोरियल वीडियो जिसमें [1:21] कोड लिखे हैं वो वाले ज्यादा प्रेफर्ड है [1:23] ताकि आगे वाली की वीडियोस की हम प्लानिंग [1:25] कर लें। और इस वीडियो से अगर कुछ [1:26] इंटरेस्टिंग सीखा है तो प्लीज नीचे [1:29] ड्रॉपडाउन कमेंट में देके जाना। वीडियो का [1:31] ज्यादा कमेंट टारगेट नहीं है। सिर्फ और [1:33] सिर्फ हम 100 कमेंट्स की बात कर रहे हैं। [1:35] छोटा सा टारगेट है कंप्लीट करवा दो। तो [1:37] चलिए जी जिन लोगों को नहीं पता कि वीडियोस [1:41] ये सब क्या होते हैं इस पे तो हम आएंगे ही [1:43] अभी। बट वीडियोस ना आप हमेशा वीडियोस को [1:45] कुछ इस तरह से देखिएगा कि वीडियोस आपके [1:47] हमेशा एक कंटेनर होते हैं। इन कंटेनर के [1:50] नाम होते हैं। मे बी अ आपने देखा होगा MP4 [1:52] सबसे वन ऑफ दी कॉमन नेम है इन अ कंटेनर्स [1:55] का। तो वो भी हो सकता है हम इसका कलर चेंज [1:59] कर लेते हैं। ओके टेक्स्ट का तो नहीं हम [2:03] ट्रांसपेरेंट कर दें इसको। आई थिंक [2:08] ओके हम इसको बैकग्राउंड को इस तरह से कर [2:11] लेते हैं। ठीक है? तो वापस से लिखते हैं। [2:13] तो आपने एम mp34 सबसे कॉमन देखे होंगे जो [2:17] अ फॉर्मेट आता है mp4 बट आपने mkv भी देखे [2:22] होंगे या फिर आपने और भी कई फॉर्मेट देखे [2:24] होंगे। इन सारे फॉर्मेट को वीडियो की [2:26] टर्मिनोलॉजी में कंटेनर बोला जाता है। [2:28] क्योंकि इसके अंदर फर्दर इंफॉर्मेशन होती [2:30] है। आपके फ्रेम्स होते हैं, ऑडियोज़ होती [2:32] है। कई बार एसआरटी सब टाइटल्स भी होते [2:34] हैं। तो ये सब कंटेनर ही होते हैं। जब आप [2:36] एफएफएम पैक यूज़ करते हो एफएफएम पैक बाय द [2:38] वे आपको नहीं पता। तो एफएफ एमक एक वन ऑफ [2:41] दी स्टैंडर्ड आई थिंक ओनली स्टैंडर्ड [2:43] लाइब्रेरी है जो कि वीडियोस को प्रोसेस [2:46] करती है और बहुत ही ज्यादा स्केल पे यूज़ [2:49] होती है। कुछ छोटे कॉम्पिटिट माइट बी हो [2:51] सकते हैं बट एज ऑफ नाउ दे आर द ओनली जॉइंट [2:54] होल्डिंग द मोनोपोली ऑफ प्रोसेसिंग द [2:58] वीडियो नाइसली हैंडलिंग ऑलमोस्ट एव्री [3:01] फॉर्मेट मतलब जितना भी हो सकता है सब कुछ [3:03] करते हैं। दे आर द ओनली मोनोपोली कंपनी [3:06] एंड बेस्ट पार्ट इज़ दे आर कंप्लीटली ओपन [3:08] सोर्स टोटली रिलायड ऑन जो कंट्रीब्यूशन [3:12] देते हैं या फिर जो बड़ी कंपनियां इनको [3:14] स्पॉनसर करती है। हालांकि इन्होंने ट्वीट [3:15] में कहा है कि Facebook इतना स्पॉनसर नहीं [3:17] कर रही जितना करना चाहिए उनको बट व्हाटएवर [3:20] इज दिस। तो एफएफएम पैक की कहानी है। [3:23] एफएफएम पैकग आपको वीडियोस को हैंडल करने [3:25] में मदद करता है। तो आपका वीडियो किसी भी [3:27] फॉर्मेट में आप एफएफएम पैकग में डाल सकते [3:29] हैं। यही आपके वीडियो को 1080p से 480p [3:33] में बनाता है। 480 से 360 और इन 360p [3:36] वीडियो को लेके अगर आपको एचएलएस फ्रेंडली [3:37] बनाना है, फ्रेम्स जनरेट करनी है, M3U8 [3:40] करना जो भी आपको चाहिए वो मोस्टली एफएफएम [3:42] पैक से ही होता है या इसके थ्रू हो जाता [3:44] है। तो यह तो रही हमारी प्री बेस की [3:46] कहानी। अब जितने भी आप मोस्टली देखते हैं [3:48] YouTube ने कभी अनाउंस नहीं करा एस सच [3:50] ऑफिशियली बट आई थिंक सम हाउ दे आर आल्सो [3:52] यूजिंग इट। Facebook ने तो कहा है कि वो [3:54] यूज करते ही हैं इसको। पूरी कहानी अभी [3:55] आपको बताते हैं। वह पूरा डिटेल में जाती [3:57] हैं। आई थिंक Netflix भी यूज़ करता है। [4:00] मोस्टली जितने वीडियो सशंस हम भी यूज़ करते [4:02] हैं और बहुत अच्छे हैं। तो करते हैं। अब [4:04] Facebook की कहानी क्या है कि Facebook ने [4:06] कहा कि हमारा मीडिया इकोसिस्टम ग्रो हो [4:08] रहा है। अब Facebook है, Instagram है, [4:10] WhatsApp है। यहां पे बहुत पर डे पे [4:12] वीडियोस आते हैं और आप इमेजिन कर सकते हो [4:14] जिस हिसाब से रील्स और यह कंटेंट बढ़ रहा [4:16] है तो 1 बिलियन वीडियोस डेली प्रोसेस करते [4:18] हैं वो। प्रोबेबबली ज्यादा ही करते हैं। 1 [4:21] बिलियन से भी कहीं ज्यादा। क्योंकि जिस [4:23] हिसाब से रील मैं भी स्क्रॉल कर रहा हूं [4:24] और आप भी स्क्रॉल कर रहे हो उस हिसाब से [4:26] वो रील खत्म तो नहीं हो रही है। कमेंट [4:28] सेक्शन में जरूर बताना खत्म हो रही है कि [4:29] नहीं हो रही है आपकी रील। तो ऑब्वियस सी [4:32] बात है इन वीडियोस का अगर आप साइज भी [4:33] देखोगे तो स्केल पे है और जहां पर बात आ [4:37] जाती है तो अब सोचने वाली बात नहीं [4:39] क्योंकि अब तो बस ग्रोथ ही है इसके बाद [4:41] pटाबाइट तक भी ठीक है मामला थोड़ा बहुत [4:44] ठीक है मैंने देखा है pटाबाइट स्केल बट [4:47] अभी तक नहीं देखा मैंने [हंसी] पर्सनली तो [4:49] बट हां ये है तो हमें समझ में आ गया कि [4:51] ठीक है Facebook का इकोसिस्टम इतना बढ़िया [4:53] है अब Facebook क्या करता है कि जब आप ये [4:55] fmp यूज़ करते हो तो मोस्टली एफएफएम पैक [4:58] क्या है कमांड लाइन के थ्रू ही यूज़ सब [4:59] कमांड लाइन के थ्रू ही यूज़ करते हैं। [5:00] वैसे कुछ गुई रैपर्स वगैरह भी हैं। बट [5:03] मोस्टली सब कमांड लाइन ही प्रेफर करते [5:04] हैं। सबने अपनी-अपनी कमांड बना के रख रखी [5:07] है कि हां इससे बेस्ट आउटपुट आता है [5:09] क्योंकि हर एक चीज आप कंट्रोल करते हो। [5:10] कितना फ्रेम रेट चाहिए? ऑडियो का कितना [5:12] डिग्रेडेशन चाहिए? अपग्रेडेशन चाहिए। [5:15] फ्रेम ज्यादा है, कम है। डुप्लीकेट फ्रेम [5:17] को हटा सकते हैं। क्या फ्रेम वगैरह बहुत [5:19] चीजें हैं इसके अंदर। तो हर कोई अपना ना [5:20] कमांड लाइन स्टोर करके रखता है और वहां से [5:22] होता है। अब कमांड लाइन ऐसा नहीं कि हमेशा [5:24] फेल होती है। हमेशा बिल्ड करती है। कभी [5:27] कबभार फेल भी होती है। तो जब ट्रेडिशनल [5:29] आर्किटेक्चर है उसका प्रॉब्लम क्या है कि [5:31] ये सिंगल मशीन बॉटल नेक है। एफएफ एमपैकग [5:33] मोस्टली सीपीयू हैवी था एक टाइम तक। अभी [5:36] काफी जीpयू ओके ओरिएंटेड भी आने लगा है। [5:39] लेकिन ट्रेडिशनल इसका बॉटल नेक यही है कि [5:40] सिंगल मशीन क्योंकि एक मशीन पे आप कितने [5:43] ही प्रोसेस करवा लोगे क्योंकि इसका अभी तक [5:45] आप जितना देखोगे ना यह मल्टी प्रोसेसिंग [5:48] मल्टी थ्रेड्स वगैरह पे नहीं था यह [5:50] सॉफ्टवेयर अभी तक बट स्टिल इट वर्क्स [5:52] ग्रेट। तो अगर आप इस आर्किटेक्चर पे जाते [5:54] हो तो सभी को बहुत सारी मशीनंस लगानी [5:56] पड़ती है क्योंकि वीडियो प्रोसेसिंग का [5:57] काम है और कुछ और कर नहीं सकते। ज्यादा [5:59] वीडियो प्रोसेस करने ज्यादा मशीनंस पिन [6:01] करो। मैंने भी वो इंफ्रा इंफ्रास्ट्रक्चर [6:04] देखा है जहां पर आपकी 3-300 4400 मशीन [6:06] स्पिन हो रही है कंटीन्यूअसली। ऐसा नहीं [6:08] कि ऑल टाइम स्पिन रहती है बट स्पिन होती [6:10] है। वो कुछ वीडियोस को प्रोसेस करती है। [6:12] S3 पे वीडियोस को फेंकती है। S3 अपने आप [6:14] नोटिफिकेशन भेजता है। एंड दैट्स इट दे गो [6:15] अवे। दिस इज़ द ट्रेडिशनल सिस्टम [6:17] आर्किटेक्चर। तो अब यहां पे है [6:20] अनएक्सेप्टेबल प्रोसेसिंग लेटेंसी। यह [6:22] वीडियोस को प्रोसेस होने में देखो टाइम [6:24] लगता है। इसमें कोई डाउट नहीं है कि अगर [6:26] आप 1 घंटे का भी वीडियो प्रोसेस कर रहे हो [6:27] तो यूजुअली 1 घंटा ही लगता है। अभी [6:29] प्रोसेसिंग आई थिंक कंपेरेटिवली फास्ट [6:31] होने लगी है। बट स्टिल ऐसा नहीं है कि 1 [6:33] घंटे का वीडियो है तो आप उसको 5 मिनट में [6:34] प्रोसेस कर दोगे। वीडियो प्रोसेसिंग इज़ वन [6:36] ऑफ़ द टाइम कंज्यूमिंग टास्क। अब यहां पे [6:39] बिलियंस ऑफ डॉलर के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर [6:40] कॉस्ट आती है। लेकिन अभी क्या है कि [6:43] इन्होंने क्या करा? जब भी वीडियो आपका [6:46] प्रोसेस होता है ना जैसे आप एक 10 एक [6:48] वीडियो को 1080p में कर रहे हैं तो कुछ [6:49] इनका इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ इस तरह से है कि [6:51] सपोज करो यह मेरा वीडियो है। अब इस सेम [6:56] वीडियो को आपको प्रोसेस करना है सपोज़ करो [6:58] 720p में। तो ये 720p के अंदर होगा। अ सेम [7:02] यही वीडियो आपको दोबारा से 480p के अंदर [7:04] भी प्रोसेस करना है। तो यही सेम वीडियो जा [7:07] रहा है 720p में। यही वीडियो जा रहा है [7:09] 480p में। तो इनका आर्किटेक्चर क्या बोलता [7:11] है कि इसके लिए अलग मशीन लगाओ। हम लगाते [7:14] हैं। इसके लिए भी एक अलग मशीन लगा लेते [7:15] हैं या फिर सेम मशीन पर दो कर लेते हैं। [7:17] इनका आर्किटेक्चर बड़ा ही इंटरेस्टिंग और [7:20] डिटेल है जो मैं आपको अभी बताता हूं। यहां [7:21] पे इन्होंने लिख भी रखा है। तो उसमें हम [7:24] चलते हैं। [7:25] ओके। [7:28] तो यहां पे [7:31] ओके ओके ओके। [7:33] एक सेकंड पॉज करके मैं आपको लाइन दिखाता [7:35] हूं। यस। तो एग्जैक्ट जो लाइन पढ़ने लायक [7:38] है वो यह है टू वर्क अराउंड दिस यही जो [7:41] मैंने आपको प्रोसेस बताया उसको मल्टीपल [7:43] आउटपुट कुड बी जनरेटेड विद सिंगल एफएफएम [7:46] पे कमांड लाइन अच्छा जी सिंगल आउटपुट्स [7:49] सिंगल कमांड से मल्टीपल आउटपुट जनरेट हो [7:51] सकते हैं। ओके डिकोडिंग द फ्रेम ऑफ अ [7:54] वीडियो वंस एंड सेंडिंग देम ईच आउटपुट [7:57] एनकोडर इंस्टेंस। तो ये लोग क्या कर रहे [7:59] हैं? बड़े स्मार्टली इन्होंने डायग्राम भी [8:01] बना रखा है। बड़ा अच्छा डायग्राम है यहां [8:03] पे कि ये इन्होंने क्या करा? एफएफ एम पैक [8:05] के थ्रू एक कस्टम डिकोडर बनाया क्योंकि [8:07] वीडियो जब भी डिकोड होता है ना उसके बाद [8:09] वापस से तुरंत एफएफ उसको असेंबल करता है [8:11] और तभी आपको 780p आउटपुट निकलता है कि [8:13] उसने डिकोड करा अब डिकोड करके उसको 720p [8:16] में डालेगा वापस से आपको 480 करना है तो [8:18] वापस से डिकोड करेगा और फिर से 720p तो [8:20] ऐसे ही चल रहा था अभी तक ट्रेडिशनली बट [8:22] इन्होंने सम हाउ उसमें से वो डिकोडर निकाल [8:25] के अलग रख लिया कि हम डिकोडर फेस तक ही [8:27] काम करेंगे और उसके बाद यहां पे स्केलर्स [8:29] हैं जो कि वीडियोस को स्केल करते हैं। [8:30] स्केल अप और स्केल डाउन व्हाटएवर इट इज़। [8:32] तो इन्होंने स्केल अप कर लिया या स्केल [8:34] डाउन कर लिया। तो एक ही इंस्टेंस है उसको [8:36] हमने बार-बार सब जगह यहां पर भेजा है। अब [8:38] एनकोडर तो ऑब्वियस सी बात है वीडियो डिकोड [8:40] होने के बाद वापस से एनकोड होगा ही होगा। [8:42] जो भी फॉर्मेट में चाहिए आपको एमकेवी MP4 [8:45] 720p 480p [8:47] डैश चाहिए एचएलएस चाहिए जो भी आपको [8:49] फॉर्मेट चाहिए वो सारा आउटपुट यहां पे आ [8:51] जाता है। तो ये बड़ा ही इंटरेस्टिंग और आई [8:54] थिंक मैंने वन ऑफ दी रेयर केसेस में ही [8:58] देखा है कि यार वर्क अराउंड है बट इट इज़ [8:59] वेरी वेरी गुड। इन्होंने कहा है कि यहां [9:02] पर आप देखोगे दिस एलिमिनेट अ लॉट ऑफ [9:05] ओवरहेड बाय डी डुप्लीकेशन ऑफ वीडियो [9:06] डिकोडिंग एंड प्रोसेसिंग स्टार्टअप ओवरहेड [9:10] क्योंकि हर वीडियो को वापस से डिकोड करना [9:11] पड़ रहा था। गिवन दैट वी प्रोसेस ओवर 1 [9:14] बिलियन वीडियो अपलोड डेली ईच रिक्वायरिंग [9:17] मल्टीपल एफएफएम पैक एग्जीक्यूशन ऑब्वियस [9:19] सी बात है सिग्निफिकेंट चंक डीकोड का तो [9:22] गायब ही हो गया है। अ रिडक्शन इन पर [9:23] प्रोसेस कंप्यूट यूसेज यील्ड सिग्निफिकेंट [9:26] एफिशिएंसी गेंस अ सिस्टम डिज़ाइंस और इन सब [9:30] चीजों में ना जब हमेशा ऐसा कुछ नहीं होता [9:32] कि कुछ खतरनाक हो जाता है। एक छोटा सा [9:34] ब्रेक थ्रू ही होता है यूजुअली। तो वहां [9:36] पे आप देखोगे बड़ा इंटरेस्टिंग होता है। तो [9:38] इन्होंने यही काम करा। तो अब आपको समझ में [9:39] आएगा यह था ट्रेडिशनल आर्किटेक्चर। [9:42] इन्होंने बनाया डिस्ट्रीब्यूटेड [9:43] प्रोसेसिंग पावर हाउस। रीइमेजिन द ओपन [9:45] सोर्स को रियल टाइम प्रोसेसिंग एट स्केल, [9:48] मेंटेन क्वालिटी एफिशिएंसी। तो यही पूरा [9:49] जो काम है इन्होंने किया है कि यह जो [9:51] डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ पावर हाउस है कि [9:53] डिकोडिंग के लिए अब हम बड़ी मशीन भी लगा [9:54] सकते हैं क्योंकि वीडियो सिर्फ डिकोड हो [9:56] रहा है। उसके बाद अपने-अपने एनकोडर में जा [9:58] रहा है। तो वेरी नाइस एंड इंटरेस्टिंग [10:00] थिंग। अब इन्होंने और क्या करा है कि [10:02] इन्होंने इंजेशन और प्रीवैलिडेशन भी लगाए [10:04] जो कि 1 बिलियन वीडियोस को स्कैन करती है। [10:07] अब इंटरेस्टिंग बात यह है कि स्कैन करने [10:09] के लिए ना वीडियो को डिकोड करना या [10:10] फ्रेम्स या कुछ ना कुछ डिटेक्शन एल्गोरिदम [10:12] तो चाहिए ही चाहिए। वहां पे भी यह [10:15] पाइपलाइन एज़ इट इज़ यूज़ हो सकती है। दैट्स [10:17] वेरी इंटरेस्टिंग। क्योंकि आपने डिकोड करा [10:19] है। मे बी उसी टाइम पे आप कुछ फ्रेम पे तो [10:21] यह यहां पे पहुंचने से पहले ही अगर यहां [10:23] डिकोडर पे स्कैन भी हो जाए। यू सेव अ लॉट [10:26] ऑफ़ थिंग। क्योंकि वीडियो जो करप्ट है उनको [10:28] प्रोसेस ही नहीं करना है। जो वीडियोस के [10:30] अंदर वैसे तो मुझे लगता नहीं Facebook, [10:32] Instagram कुछ भी रोकते हैं सच कुछ होता [10:34] है क्योंकि वहां तो कुछ भी चल रहा है बट [10:36] जो रोकना चाहते हैं मे बी थोड़ा बहुत तो [10:39] वो रोक सकते हैं यहां पे। उसके अलावा एक [10:41] और आपको यहां पे डायग्राम दिखेगा। दिस इज [10:43] वै नाइस। तो इनेबलिंग रियल टाइम क्वालिटी [10:46] मैट्रिक्स व्हाइल ट्रांसपोर्टिंग फॉर लाइव [10:48] स्ट्रीम। तो इन्होंने ये का ये सेम इंफ्रा [10:50] देखो दो टाइप के वीडियोस होते हैं। एक [10:52] वीओडी एक लाइव स्ट्रीम। वीओडी है वीडियो [10:54] ऑन डिमांड और लाइव स्ट्रीम्स हैं जो [10:56] स्ट्रीम आप देखते रहते हो YouTube वगैरह [10:58] पे वो सब तो इन्होंने क्या करा कि यहां पे [11:00] वापस से इनपुट जो वीडियो है वो बिट [11:02] स्ट्रीम्स में आता है यहां पे इन्होंने [11:03] वापस से सेम डिकोडर यूज़ करा और यहां पे [11:06] अनस्केल्ड फ्रेम है। तो ये जो इनका एम [11:08] स्केलर है ना यह भी बड़ा इंटरेस्टिंग है। [11:10] ये रेफरेंस फ्रेम वगैरह से करता है। तो [11:11] देखो आपको यहां पे दिखाई देगा। तो [11:14] इंटरेस्टिंग चीज़ मेरे को जो और लगी इसके [11:16] बाद में अ यस दिस इज़ द वन जो आपको देखनी [11:21] चाहिए। [11:22] यहां पर इन्होंने कहा एफएफ एम पैक कैन [11:23] कंप्यूट वेरियस विजुअल क्वालिटी मैट्रिक्स [11:25] सच एज पीएसएआर एसएसआर यह तो सब मैं भी पढ़ [11:28] रहा हूं और ज्यादा क्योंकि बड़े [11:29] इंटरेस्टिंग मैट्रिक्स हैं। मैंने एज सच [11:32] कोई पर्सनली फर्स्ट हैंड इन मैट्रिससेस को [11:34] इतना ज्यादा नहीं देखा तो दैट्स व्हाई आई [11:35] एम स्टिल लर्निंग। तो जब मुझे पता लग [11:36] जाएंगे तो पक्का मैं वीडियो इस पे बनाऊंगा [11:38] ही बनाऊंगा। इसके बाद जस्ट वीडियो के बाद [11:40] मैं इसी पे जाने वाला हूं। इसीलिए [11:41] इंजीनियरिंग ब्लॉग्स पढ़ते हैं सब लोग कि [11:43] नए टर्म्स मिल जाते हैं। उन नए टर्म्स को [11:44] आप देखते हो, खोजते हो, मजा आता है। दैट्स [11:46] द होल थिंग। [11:48] तो इन्होंने कहा कि दिस इज ओके फॉर ऑफलाइन [11:50] और वीडियो वर्ड यूज़ केस। ये सब जगह यही [11:53] टर्मिनोलॉजी इसीलिए कहते हैं सिस्टम [11:54] डिजाइन जब आप पढ़ते हो इन टर्मिनोलॉजी से [11:56] फेमिलियर हो जाते हैं। जैसे मैंने बहुत [11:57] पहले पढ़ लिया था वी ओ डी वीडियो ऑन डिमांड [11:59] होता है। हम यूज़ भी करते हैं। बट ऐसे नए [12:01] टर्म्स आते हैं। अह बट नॉट फॉर लाइव [12:03] स्ट्रीमिंग वेयर वी माइट वांट टू कंप्यूट [12:05] क्वालिटी मैट्रिक्स इन रियल टाइम। टू डू [12:07] दिस वी नीड टू इंसर्ट अ वीडियो डिकोडर [12:10] आफ्टर ईच वीडियो एनकोडर यूज्ड बाय ईच [12:13] आउटपुट लेन। अब इंटरेस्टिंग बात है कि [12:16] इन्होंने यह जो वीडियो एनकोडर है सॉरी [12:19] वीडियो डिकोडर है यह हर एक एनकोडर के बाद [12:22] क्यों रखा यहां पर जैसे अगर आप देखोगे [12:24] इसको वापस से तो यहां पे एम एनकोडर्स हैं [12:27] और ये एम डिकोडर्स वापस आते हैं। इसको मैं [12:31] थोड़ा सा और अभी आपको बताता हूं क्योंकि [12:32] ये आपको डायरेक्टली यहीं समझ में आ जाएगा। [12:34] अ तो कहां गए हम? यहां पे थे। आफ्टर ईच [12:39] वीडियो एनकोडर टू डू दिस वी नीड टू इंसर्ट [12:41] अ वीडियो डिकोडर। आफ्टर ईच वीडियो एनकोडर [12:44] यूज्ड बाय ईच आउटपुट लेन। तो आपका जब [12:46] वीडियो लाइव स्ट्रीम भी होता है तब भी [12:48] आपकी क्वालिटी डिपेंड करती है क्योंकि हर [12:49] कोई डिटेक्ट करता है कि आप किस नेटवर्क पे [12:51] हो। उस नेटवर्क की स्पीड कितनी है यह सब [12:54] डिटेक्ट किया जाता है बिहाइंड द सीन और [12:55] उसके बेसिस पे आपको वीडियो स्ट्रीम भी [12:57] किया जाता है। वीडियो ऑन डिमांड में भी [12:58] होता है बट स्ट्रीम में तो बहुत ज्यादा [12:59] इसका ध्यान रखता है। दीज़ प्रोवाइड बिटमैप [13:02] फॉर ईच फ्रेम इन द वीडियो आफ्टर कंप्रेशन [13:05] हैज़ बीन अपाइड सो दैट वी कैन कंप्रेस [13:07] अगेंस्ट द फ्रेम बिफोर कंप्रेशन। यह बड़ी [13:12] इंटरेस्टिंग है। इसको दोबारा से अगर आपका [13:14] मन करे तो पढ़ना। दिस इज वन ऑफ द वेरी [13:16] इंटरेस्टिंग लाइन जो कि लाइव स्ट्रीम के [13:18] लिए इंटरेस्टिंग है कि [13:21] और हालांकि यह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रिपेयर [13:24] करना भी अपने आप में एक बहुत बड़ा चैलेंज [13:26] है कि अगर इस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर आप [13:28] प्रिपेयर कर पा रहे हो। आई थिंक बड़ी [13:30] कंपनियों के बस की बात है। बट होपफुली [13:31] जल्दी आएगा यह भी। बट हां आई लव्ड दिस कि [13:34] bिटमप्स वगैरह सब क्योंकि bिटमप्स को ना [13:37] आप किसी भी मशीन लर्निंग एल्गोरिदम या [13:38] कहीं पे भी डाल के ना बहुत कुछ डिटेक्ट कर [13:40] सकते हो। दैट इज़ द वन ऑफ़ द थिंग। इन द एंड [13:42] वी कैन प्रोड्यूस क्वालिटी मैट्रिक्स फॉर [13:44] ईच अनकोडेड लेन इन रियल टाइम यूजिंग सिंगल [13:46] एफएफएम बैक कमांड। राइट? तो ये तो है ही। [13:48] अब इंटरेस्टिंग चीज़ आपको मैं बताता हूं कि [13:50] कैसे Facebook हेल्प या Facebook ने हेल्प [13:53] करा कम्युनिटी का। तो थैंक्स टू इन लूप ये [13:56] हो गया। तो थिंग्स लाइक रियल टाइम [13:58] क्वालिटी मैट्रिक्स। ओके। ओके। यह तो ठीक [14:01] है। [14:02] हां, यह रहा आवर कंटिन्यूड कमिटमेंट टू [14:05] एफएफएम पैग विद मोर एफिशिएंट मल्टीलेन [14:08] एनकोडिंग एंड रियल टाइम क्वालिटी [14:09] मैट्रिक्स वी आर एबल टू फुल्ली डेप्लिककेट [14:12] आवर इंटरनल फर्क फॉर वीडियो एंड डिमांड। [14:14] तो क्या हुआ था कि Facebook ने क्या करा [14:17] कि एफएफएम पे क्योंकि ओपन सोर्स है और [14:19] इन्होंने एज़ इट इज़ नहीं लिया। उसको फर्क [14:21] किया। उसके बाद खुद की इंजीनियरिंग टीम [14:23] लगा के और यह जो जो इसके प्रोसेसिंग में [14:25] इशूज़ थे जैसे पैरेलल प्रोसेसिंग नहीं हो [14:27] रही। इनको बहुत सारे वीडियो ऑन डिमांड, [14:29] लाइव स्ट्रीमिंग पाइपलाइन ये सब इनको [14:31] चाहिए था। तो इन्होंने खुद का पाइपलाइन [14:32] पूरा बिल्ड कर लिया। अब हालांकि टेक्निकली [14:37] तो अगर आपने बिल्ड करा है, इतना बड़ा कुछ [14:39] है तो प्रोबब्ली यू कुड हैव सबमिटेड बैक [14:41] टू द ओपन सोर्स। अ बट यूजुअली कंपनियां [14:44] इतना भी ओपन सोर्स नहीं करती है। कुछ [14:46] चीजें अपनी प्रोपराइटरी रखती है बिकॉज़ [14:48] दैट्स द स्केलिंग और स्केलिंग इज़ वन ऑफ़ द [14:50] प्रोपराइटरी थिंग। ओके? एंड थैंक्स टू द [14:53] स्टैंडर्ड स्टैंडर्डाइज़्ड हार्डवेयर [14:55] एपीआईज़ इन एफएफ एमग। वी वर एबल टू सपोर्ट [14:58] आवर एमएसवीपी एएसआईसी अलोंग साइड [15:00] सॉफ्टवेयर बेस्ड पाइपलाइन विद मिनि [15:02] फ्रिक्शन। इन सबको छोड़ो। इन सब में आप मत [15:05] जाओ। अभी आप यह देखो सिर्फ एफएफ एमक हैज़ [15:08] विदस्टुड द टेस्ट ऑफ़ टाइम 25 इयर्स ऑफ़ [15:10] एक्टिव डेवलपमेंट बहुत बड़ा होता है। बट [15:13] इन्होंने क्या करा है? अ डेवलपमेंट दैट [15:16] इंप्रूव द रिसोर्स यूटिलाइज़ेशन ऐड सपोर्ट। [15:18] अब जो नया वाला कोडक है एफएफक का जो नए [15:22] वर्जनंस है उसके अंदर यह सब कुछ [15:24] डायरेक्टली अवेलेबल है। तो अगर कोई खुद का [15:26] इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहे डेफिनेटली और [15:28] मिलेगा। बट ये जो पेपर्स होते हैं ये आपको [15:30] सिर्फ एक थॉट प्रोसेस देते हैं कि अच्छा [15:32] ऐसा भी कुछ है। तो अभी जो नए वाले एफएफ एम [15:35] पैग है आई थिंक इन्होंने नए वर्जन के बारे [15:37] में भी कहीं तो लिखा है। मैं देखता हूं एक [15:39] सेकंड। हां जी। यह रही वो लाइन अ जहां पे [15:43] इन्होंने कहा है कि डायग्राम के जस्ट ऊपर [15:46] है। बाय द वे। थैंक्स टू द कंट्रीब्यूशन [15:48] फ्रॉम एफएफ एम पैक डेवलपर्स इंक्लूडिंग [15:49] दोज़ एट एफएफ लैब्स एंड वीडियो वीएलसी जो [15:52] आपने देखा है मोर एफिशिएंट थ्रेडिंग वाज़ [15:55] इंप्लीमेंटेड स्टार्टिंग विद एफएफएम पैक [15:57] सिक्स वर्जन अभी बाय द वे एट वर्जन पे है [15:59] हम अगर इंजन केस जिन्होंने एफएफएम पैग [16:03] नहीं देखा है प्लीज देख जरूर लेना कि कहां [16:05] पे अभी हम चल रहे हैं तो आप देखोगे तो आई [16:07] थिंक अभी तो हम एफएफएम पैक के वर्जन एट पे [16:10] हैं जो कि इनक्रेडिबली फास्ट है। तो वह जो [16:12] फास्ट हुआ कहीं ना कहीं यह क्रेडिट भी ले [16:14] रहे हैं उस बात का बट ठीक है इट्स ओके तो [16:17] यहां पे देखो क्या है कि एफएफक के अंदर जो [16:19] था यह मल्टी थ्रेडिंग एफिशिएंसी या मोर [16:21] थ्रेड्स हम यूज़ कर पाए प्रोसेसिंग के [16:23] दौरान इसका इंप्लीमेंटेशन स्टार्ट हुआ [16:25] एफएफ एमmक सिक्स पे विथ द फिनिशिंग टचेस [16:27] लैंडिंग इन एट वर्जन के अंदर दिस वाज़ यह [16:31] इंटरेस्टिंग है। दिस वाज़ डायरेक्टली [16:33] इन्फ्लुएंस्ड बाय द डिज़ाइन ऑफ़ आवर इंटरनल [16:35] फोर्क एंड वाज़ वन ऑफ़ द मेन फीचर वी हैड [16:39] रिलाइड ऑन इट टू प्रोवाइड। अब इंटरेस्टिंग [16:42] बात यह है मुझे नहीं समझ आया कि इनके [16:46] वर्जन ने कैसे उनको इन्फ्लुएंस किया। मे [16:48] बी उनकी टीम डायरेक्टली कांटेक्ट में थी, [16:49] टच में थी। व्हाटएवर इज़ द केस। दिस [16:51] डेवलपमेंट लेड टू द मोस्ट कॉम्प्लेक्स [16:53] रिफैक्टिंग ऑफ़ एफएफएम पैग इन डेकेड्स एंड [16:56] दिस हैज़ इनेबल्ड मोर एफिशिएंट एंड कोडिंग [16:58] फॉर ऑल द एफएफएम पैग यूज़र। अब इंटरेस्टिंग [17:00] बात क्या है? इंटरेस्टिंग बात यह है कि [17:02] अगर आपको इससे थोड़ा भी आईडिया लग गया कि [17:04] ठीक है नाउ वीडियो पाइपलाइन इवन लाइव [17:07] स्ट्रीमिंग उनके अंदर आपके पास अब इतना [17:09] हैवी इंफ्रा इतनी बड़ी मशीनंस लगाने की [17:11] जरूरत नहीं है क्योंकि अब मल्टी थ्रेड [17:12] मल्टी प्रोसेसर्स को हम ज्यादा एफिशिएंटली [17:15] यूज़ कर पाते हैं। बट अब आपको अगर और इसके [17:17] बारे में जानना है तो अब हमें जंप करना [17:19] पड़ेगा एफएफ पैक पे। तो आप जाकर देखोगे तो [17:21] यह न्यू मेजर जो रिलीज है इनका थोड़ा और [17:25] ज़ूम करते हैं। इसमें है अवेलेबल टू [17:27] डाउनलोड है। इसमें आपको नेटिव एनकोडर्स जो [17:29] नए प्रोसेस RS Apple वगैरह के वो सब तो आए [17:31] हैं। और उसके अलावा दिस न्यू क्लास ऑफ़ [17:35] डिकोडर एनकोडर बेस्ड ऑन प्योर व्कन [17:37] कंप्यूट इंप्लीमेंटेशन। यही शायद वो है। [17:39] व्कन कंप्यूट इंप्लीमेंटेशन जब मैंने पहली [17:42] बार पढ़ा मुझे नहीं समझ में आया कि ये क्या [17:44] नाम है कहां से है। तो आई थिंक दिस इज़ [17:46] व्हाट दे आर रेफरिंग टू द होल [17:48] इंफ्रास्ट्रक्चर। तो वहां से इसकी शुरुआत [17:50] हुई। व्कन इज़ अ क्रॉस प्लेटफार्म ओपन [17:52] स्टैंडर्ड सेट्स ऑफ़ एपीआई दैट अलाउ [17:54] प्रोग्राम्स टू यूज़ जीपीयू हार्डवेयर्स इन [17:57] वेरियस वेज़। तो ज्यादा देखो [हंसी] एआई तो [18:00] जीpu यूज़ कर ही रहा था। वीडियो प्रोसेसिंग [18:02] में हम और ज्यादा कर पा रहे हैं। फ्रॉम [18:04] ड्राइंग स्क्रीन्स टू कैलकुलेशन टू [18:06] डिकोडिंग वीडियो व्हाई कस्टम हार्डवेयर [18:08] एक्सेलेटर। ये जो कस्टम हार्डवेयर [18:09] एक्सेलेटर है ना ये आपको Apple के अंदर भी [18:12] मिलता है। इसलिए Apple के अंदर थोड़ा सा [18:14] एफएफएम पैक जब आप चलाते हो तो थोड़ा [18:15] कंपेरेटिवली फास्ट मिलता है। बट बहुत सारे [18:18] अ क्लाउड प्रोवाइडर्स आपको कस्टम [18:20] हार्डवेयर एक्सेलरेटर देते हैं। यही वो है [18:22] एक्चुअली में जो इसको प्रोवाइड करता है। [18:25] रादर देन यूजिंग कस्टम हार्डवेयर एक्सेलर [18:28] प्रेजेंट दीज़ डिकोडर्स आर बेस्ड ऑन [18:30] कंप्यूट शेडर्स वर्क ऑन इंप्लीमेंटेशन। [18:33] डिकोडर्स यूज़ द सेम ये सारे तो अब देखो [18:36] बहुत ज्यादा मेरे भी ऊपर से जा रहे हैं। अ [18:38] बट इसमें आप और भी देखोगे ना तो यही सब [18:40] इंप्लीमेंटेशन आपको दिखेगा। तो उसके बाद [18:42] जब मैंने ये थोड़ा सा पढ़ा ना तब मुझे समझ [18:44] में आया यहां पे जैसे ओनली कोडक्स [18:46] स्पेसिफिकली डिज़ फॉर पैरेलल डिकोडिंग कैन [18:48] बी इंप्लीमेंटेड इन सच ए वे विद मोर मेन [18:51] स्ट्रीम कोडक्स आर बीइंग प्लान। ऐसा नहीं [18:53] है कि सारे ही एनकोडर्स डिकोडर्स इन सभी [18:56] को सपोर्ट करते हैं। MP34 वैसे भी बहुत [18:59] रोबस्ट है। आई थिंक वहां पे होगा। बट नेवर [19:01] टेस्टेड इट। अब टेस्टिंग स्टार्ट होगी। [19:03] देखते हैं क्या होता है, कैसे होता है। बट [19:05] हां, अब मुझे थोड़ा-थोड़ा क्लिक होने लगा। [19:07] पूरा तो मुझे भी नहीं हुआ अभी एकदम से। बट [19:09] थोड़ा-थोड़ा क्लिक होने लगा कि अच्छा यहां [19:11] से अब हम तार जोड़ सकते हैं। और ऐसे जो [19:14] आर्टिकल्स होते हैं ना यह होते थोड़े [19:16] शॉर्ट हैं। इन पे एक चीज और बता दूं मैं [19:18] आपको शायद बाकी लोग यूजली नहीं करते। [19:21] देखिए ये जो आर्टिकल्स होते हैं ना ये [19:23] आपको हमेशा एक नया थॉट प्रोसेस देते हैं। [19:25] क्या आप इस आर्टिकल को एक बार में 100% [19:27] समझ सकते हो? नहीं कोई नहीं समझता। दो-तीन [19:29] बार इनको पढ़ना पड़ता है। नोट्स बनाने [19:30] पड़ते हैं। फिर आप डायग्राम बनाते हो। दिस [19:32] वाज़ जस्ट रॉ वर्जन वन। तो मैं देख रहा था [19:34] तो मैंने सोचा साथ में बना देते हैं। [19:36] यूजुअली इनको जो भी पढ़ते हैं दो-तीन बार [19:38] पढ़ना ही पड़ता है। इनमें बहुत सारी [19:40] टर्म्स होती है। फिर आप उन टर्म्स को [19:41] पढ़ते हो, रिसर्च करते हो थोड़ा सा फिर और [19:43] दोबारा से आकर पढ़ते हो तब समझ में आता [19:45] है। और सबसे इंटरेस्टिंग चीज कई बारी [19:47] आर्टिकल्स मार्केटिंग फ्रेंडली भी बनाए [19:50] जाते हैं। क्योंकि सबको पता है डेवलपर्स [19:51] ये पढ़ रहे हैं। तो मार्केटिंग भी होती है [19:53] हर कंपनी के हर आस्पेक्ट में कि हां ठीक [19:55] है वहां इंजीनियरिंग इकोसिस्टम ऐसा है। [19:57] हायरिंग में आसान होता है। थोड़ा सा [20:00] स्टॉक्स वगैरह सब जगह फर्क पड़ता है। तो [20:02] ऐसा नहीं है कि ये आपको पूरा एज इट इज कोड [20:04] दे देंगे, इंप्लीमेंटेशन आर्किटेक्चर दे [20:05] देंगे। वो आपको एक थॉट देते हैं कि ऐसा भी [20:07] किया जा सकता है। इफ यू आर कैपेबल इनफ गो [20:10] अहेड एंड डू इट नाउ। तो यह भी होता है। तो [20:12] हमेशा ग्रेन ऑफ साल्ट के साथ लें। हर एक [20:14] आर्टिकल को नो डाउट उसमें नए थॉट प्रोसेस [20:17] होते हैं। नया सीखने को मिलता है। बट विद [20:19] ग्रेन ऑफ़ साल्ट एवरीथिंग स्टैंड्स विद द [20:21] मार्केटिंग पर्सपेक्टिव। बिज़नेस तो है ही [20:23] ना। ऑब्वियस सी बात है। और उसमें गलत क्या [20:24] है? होना भी चाहिए। तो आई थिंक एक छोटा सा [20:27] रॉ वीडियो आपको अच्छा लगा होगा। जहां हमने [20:30] थोड़ा डिकोड किया। यहां पे काफी चीजें मेरे [20:32] लिए भी नहीं है। मैं जाके अब पढूंगा। ऐसे [20:34] ही आप भी पढ़ लेना। बस ऐसे आते रहो चाय कोड [20:37] पे। चाय पे चर्चा करते रहेंगे। साथ में [20:39] पढ़ते रहेंगे। कमेंट्स आप ड्रॉप कर ही [20:41] जाओगे। सब्सक्राइब तो कर ही दिया होगा। [20:42] मिलते हैं अगले वीडियो के अंदर।