[00:00] एक इंसान जो धन्दा चलाता है और एक इंसान जो 5-star office के AC cabin में बैटके ब्रेंड चलाता है, इन दोनों के बीच का डिफेंस बता देता हूँ. और अगर नहीं पता तो वीडियो को सेफ कर लो. यह इंसान है रमेश जो एक धन्दे का मालिक है और सोचता है कि इस customer ने मेरे से 2000 रुपय का समान खरीदा [00:14] लेकिन दूसरी तरख यह है विवे कॉपरा है जिनका ब्रांड है जो सोचता है कि इस customer ने मेरे से आज 2000 का समान खरीदा लेकिन अगले एक साल में ये customer मेरे पास कितनी बार आने वाला है अगर ये एक साल में चार बार आने वाला है तो 2000 multiply by 4 equals to 8000 [00:29] और ये कितने साल तक आने वाला है On an average अगर ये 3 साल भी आता है तो 8000 multiply by 3, 24000 बदल अब ये customer 24000 का customer है अब अगर 24000 में मेरा gross profit 30% है [00:41] तो 24,000 का 30% निकालोगे तो करीब कितना आएगा? 7,200 रुपे बदला भी एक customer मुझे 7,200 रुपे कमा के देता है अब इसे marketing की बाशव में कहते है LTV Lifetime Value of a Customer मतलब एक customer एक brand को [00:53] पुरी life में कितना पैसा कमा के देखा अब इस 7,200 कमाने के लिए अगर मुझे customer के उपर 1000, 1200, 1500, 2000 खर्च भी करना पड़े ads के अंदर, जिसे बोलते हैं CAC, Customer Acquisition Cost तो brand को problem नहीं होगी [01:06] लेकिन एक जो businessman है, वो सोचता है कि customer मुझे 2000 रुपे का समान लेगा तो 2000 रुपे कमाने के लिए मैं 1200, 1500 कैसे खर्च कर दूँ और इसी वज़ा से आज 90% e-commerce brand fail हो रहे हैं तो अगर आपको business को आगे लेके जाना है [01:18] 100 crore का brand बनाना है तो ये सोचना छोड़ दो कि customer आज कितने पैसे देगा ये सोचो कि customer पूरी life में कितना पैसा देने वाला है सिर्फ mindset का फर्क है इसलिए विवे कॉपराइस सौ खरोड का ब्रेंड चला रहा है और अमेश आज भी चोटी सी दुकार में धंदा कर रहा है [01:32] और सोच रहा है बड़ा कैसे करो सोच बदलो फिर देखो समय कैसे बदलता है